इंदौर में ‘सुविधानुसार' बताए जा रहे आंकड़े: कोरोना से हुई 3 मौतें अब तक सूची में नहीं, 18 मई को हुई मौत 21 को बताई

इंदौरमें कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ मौत के जो आंकड़े जारी किए जा रहे हैं, उससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। बीतेगुरुवार जाने-माने फिजिशियन डॉ. बीके शर्मा की कोरोना से चोइथराम अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी, पर रात 12 बजे बाद जारी हुए मेडिकल बुलेटिन में उनका कोई जिक्र नहीं था। हर दिन की तरह तय फार्मेट में दो ही मौतों का आंकड़ा दिया गया।

यही नहीं, 21 मई को जिन दो मरीजों की मौत की पुष्टि की गई, उनकी 18 मई को ही मृत्यु हो गई थी। यानी तीन दिन बाद विभाग ने उन्हें मौत के आंकड़े में शामिल किया। यह पहला मामला नहीं है। लगभग दो महीने के इस कोरोनाकाल में मृत्यु के आंकड़े पर कई बार सवाल उठे हैं। जिन लोगों की मृत्यु सार्वजनिक हो गई, उन्हें भी विभाग ने देरी से अपनी सूची में जोड़ा। इस लेटलतीफी के चक्कर में तीन मरीजों के नाम तो अब तक सूची में आए ही नहीं हैं।

डेथ डेटा फिक्सिंग! लगभग रोज 2 मौत के आंकड़े का सच

बुलेटिन तारीख

बताई संख्या डेथ की असल तारीख
26 मई 2 23, 25 मई
25 मई 1 23 मई
24 मई 2 23 मई
23 मई 3 23, 22, 21 मई
22 मई 2 21, 18 मई
21 मई 2 18 मई
20 मई 2 19 मई
19 मई 2 15 मई
18 मई 2 16, 17 मई
17 मई 1 16 मई
16 मई 1 15 मई
14 मई 2 14 मई
13 मई 1 12 मई
12 मई 3 11 मई
11 मई 2 10 मई
10 मई 1 8 मई
9 मई 2 8, 9 मई

30 मरीजों की कोरोना रिपोर्ट ही मौत के बाद दी

अब तक 119 मरीजों की मौत हो चुकी है, जिनमें से करीब 30 ऐसे थे, जिनकी मौत के बाद उनकी जांच रिपोर्ट मिली। ये भी रिकॉर्ड में देरी से शामिल हुए। इनमें से तीन मरीज अब भी रिकॉर्ड में नहीं आए हैं।

15 मई को मौत 20 को की घोषणा

  • 20 मई को दो मरीजों की मौत की जानकारी दी गई, उनकी मौत 15 मई को हो चुकी थी।

8 को दम तोड़ा 11 को पुष्टि की

  • 11 मई को 67 वर्षीय मरीज की मौत की पुष्टि की गई, वे दम 8 को ही तोड़ चुके थे।

रात को बुलेटिन में नाम ही गायब

  • 21 मई को अरबिंदो में दो मरीजों ने दम तोड़ा, लेकिन वे रात के बुलेटिन में नहीं थे।

फार्मेट तय, एक कर्मचारी की जिम्मेदारी ही यही, तो भी लेट

मौत की जानकारी जुटाने के नाम पर कई बार तीन दिन तो कई बार पांच दिन का समय लगा। वह भी तब, जब तीन ही कोविड अस्पताल में गंभीर मरीजों को रखा जा रहा है। वहां से तुरंत सूचना जारी हो जाती है तो फिर देरी क्यों होती है? अफसर अस्पतालों की लेटलतीफी को वजह बता रहे हैं, जबकि अरबिंदो व चोइथराम प्रबंधन का कहना है कि वे तुरंत सूचना देते हैं। अरबिंदो के प्रशासनिक अधिकारी राजीव सिंह ने कहा, हम स्वास्थ्य विभाग के फार्मेट में उसी दिन जानकारी भेज देते हैं। हमारी तरफ से देरी नहीं की जाती। देर रात भी मौत हो तो सूचना पहुंचा ही देते हैं। यह स्थिति तब है, जब विभाग ने एक कर्मचारी की ड्यूटी ही आंकड़े जुटाने पर लगाई है और आंकड़ों का फॉर्मेट भी तय है।

सीधी बात: अस्पताल देर से रिपोर्ट देते हैं, अब नोटिस देंगे-डॉ. प्रवीण जड़िया, (सीएमएचओ)

सवाल:मौत की सूचना देरी से दी जा रही है?
जवाब:
अस्पतालों से ही हमें देरी से रिपोर्ट मिलती है।
सवाल: अस्पताल कह रहे हैं कि वे तत्काल सूचना दे देते हैं।
जवाब:
नहीं, दो दिन बाद भी भेजते हैं।
सवाल: ऐसे संवेदनशील मामले में भी कोताही है तो कार्रवाई क्यों नहीं की, किसी को नोटिस दिया?
जवाब: अब करेंगे।
सवाल: इसी देरी के कारण तीन मरीजों की रिपोर्ट आंकड़ों में दर्ज नहीं हो सकी?
जवाब: हां, मरीजों की रिपोर्ट देरी से मिली थी।



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सवाल उठ रहे हैं कि जब तीन ही कोविड अस्पताल में गंभीर मरीजों को रखा जा रहा है। वहां से तुरंत सूचना जारी हो जाती है तो फिर देरी क्यों होती है? (फाइल फोटो)


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